परमाणु संरचना, जल उपचार और विद्युत रसायन के मुख्य सिद्धांत

1. बोहर का परमाणु मॉडल

  • निश्चित कक्षाएँ: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार पथों में घूमते हैं, जिन्हें स्थिर कक्षाएँ या ऊर्जा स्तर (K, L, M, N) कहते हैं।
  • ऊर्जा का नियम: अपनी निश्चित कक्षा में घूमते समय इलेक्ट्रॉन न तो ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं और न ही अवशोषित करते हैं।
  • कोणीय संवेग: इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (mvr), h/2π का पूर्ण गुणज होता है। (mvr = nh/2π)
  • ऊर्जा परिवर्तन: जब इलेक्ट्रॉन बाहरी स्रोत से ऊर्जा पाता है, तो वह उच्च ऊर्जा स्तर में कूद जाता है। वापस आते समय वह प्रकाश या तरंग के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करता है (ΔE = E2 – E1 = hν)।

2. संकरण बंधन (Hybridisation)

  • परिभाषा: जब किसी परमाणु के लगभग समान ऊर्जा वाले दो या अधिक परमाणु कक्षक आपस में मिलकर अपनी ऊर्जा का पुनर्वितरण करते हैं और समान ऊर्जा व समान आकार के नए कक्षक बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।
  • विशेषताएँ: नए बने कक्षकों को ‘संकरित कक्षक’ कहते हैं। इनकी संख्या भाग लेने वाले मूल कक्षकों के बराबर होती है। ये अधिक मजबूत और दिशात्मक बंध बनाते हैं, जिससे अणु को निश्चित आकार (sp, sp², sp³) मिलता है।

3. पाउली का अपवर्जन सिद्धांत

  • सिद्धांत: किसी भी एक परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं (n, l, m, s) के मान एक समान नहीं हो सकते।
  • नियम: यदि पहली तीन क्वांटम संख्याओं के मान समान भी हो जाएं, तो चक्रण क्वांटम संख्या (s) का मान अवश्य अलग होगा (एक +1/2 तो दूसरा -1/2)।
  • निष्कर्ष: किसी भी एक कक्षक (orbital) में अधिकतम केवल 2 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं और उनके चक्रण हमेशा विपरीत होने चाहिए।

4. परमाणु कक्षकों के आकार

  • s-कक्षक: यह पूरी तरह गोलाकार (Spherical) और अदिशात्मक होता है।
  • p-कक्षक: यह डम्बल (Dumbbell) के आकार का होता है। इसके तीन रूप होते हैं: px, py, pz।
  • d-कक्षक: यह डबल-डम्बल (Double-dumbbell) आकार का होता है। इसके 5 रूप होते हैं (dxy, dyz, dxz, dx²-y², dz²)।
  • f-कक्षक: इसकी संरचना बहुत जटिल (Complex) होती है। इसके 7 रूप होते हैं।

5. हुंड का नियम

  • नियम: किसी उपकोश (subshell) के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन (pairing) तब तक नहीं होता, जब तक कि सभी कक्षकों में एक-एक इलेक्ट्रॉन न भर जाए।
  • चक्रण: अकेले भरे हुए इलेक्ट्रॉनों का चक्रण (spin) समानांतर (parallel) होना चाहिए ताकि परमाणु का स्थायित्व अधिकतम रहे।

6. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

  • Cr (Z = 24): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ 4s¹ (अपवाद: अर्ध-भरे कक्षक के स्थायित्व के कारण)।
  • Mn (Z = 25): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ 4s²
  • Fe²⁺ (Z = 24): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁶ (बाहरी 4s से 2 इलेक्ट्रॉन बाहर निकलते हैं)।

UNIT – 2: जल की कठोरता

1. जल की कठोरता और प्रकार

  • अभिप्राय: वह जल जो साबुन के साथ आसानी से झाग नहीं देता, कठोर जल कहलाता है। यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवणों के कारण होता है।
  • अस्थायी कठोरता: यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट लवणों [Ca(HCO₃)₂, Mg(HCO₃)₂] के कारण होती है। इसे केवल उबालकर दूर किया जा सकता है।
  • स्थायी कठोरता: यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड और सल्फेट लवणों (CaCl₂, MgSO₄) के कारण होती है। इसे उबालकर दूर नहीं किया जा सकता।

2. EDTA विधि द्वारा कठोरता का निर्धारण

  • सिद्धांत: EDTA कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ एक रंगहीन संकुल (complex) बनाता है।
  • शर्तें: इसमें एरिओक्रोम ब्लैक-टी (EBT) सूचक और pH 10 बनाए रखने के लिए बफर विलयन (NH₄OH + NH₄Cl) का उपयोग करते हैं।
  • रंग परिवर्तन: एंडपॉइंट पर रंग वाइन-रेड से बदलकर गहरा नीला हो जाता है।

3. कोल्ड लाइम सोडा प्रक्रिया

  • सिद्धांत: कच्चे पानी में सामान्य तापमान पर चूना [Ca(OH)₂] और सोडा (Na₂CO₃) मिलाया जाता है।
  • क्रिया: यह कठोरता पैदा करने वाले घुलनशील लवणों को अघुलनशील अवक्षेप (CaCO₃ और Mg(OH)₂) में बदल देता है। क्रिया धीमी होने के कारण इसमें कोएगुलेंट्स मिलाने पड़ते हैं।

4. हॉट लाइम सोडा प्रक्रिया

  • प्रक्रिया: यह प्रक्रिया उबलते तापमान (80°C से 100°C) पर की जाती है।
  • लाभ: गर्म करने से रासायनिक अभिक्रिया की गति तेज हो जाती है, अवक्षेप तेजी से बैठता है, और घुली हुई गैसें बाहर निकल जाती हैं। यह अधिक शुद्ध पानी देती है।

5. B.O.D और C.O.D

  • Biochemical Oxygen Demand (B.O.D): पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने के लिए सूक्ष्मजीवों (bacteria) द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा। यह केवल जैव-अपघटनीय अशुद्धियों को मापता है और इसमें 5 दिन लगते हैं।
  • Chemical Oxygen Demand (C.O.D): पानी में उपस्थित सभी कार्बनिक पदार्थों (जैव और अजैव दोनों) को रसायनों (K₂Cr₂O₇) द्वारा ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा। इसका मान हमेशा B.O.D से अधिक होता है।

UNIT – 5: विद्युत रसायन

1. अरेनियस का आयनीकरण सिद्धांत

  • आयनीकरण: जब किसी विद्युत अपघट्य को पानी में घोला जाता है, तो वह आवेशित कणों (आयनों) में टूट जाता है।
  • उदासीनता: धनायनों और ऋणायनों पर कुल आवेश हमेशा बराबर होता है, जिससे विलयन उदासीन रहता है।
  • चालकता: विलयन में विद्युत का प्रवाह इन्हीं आयनों की गति के कारण होता है।

2. फैराडे के विद्युत अपघटन के नियम

  • प्रथम नियम: इलेक्ट्रोड पर मुक्त हुए पदार्थ का द्रव्यमान (W), प्रवाहित आवेश (Q) के समानुपाती होता है। (W = Z · I · t)
  • द्वितीय नियम: यदि श्रेणीक्रम में जुड़े विभिन्न विलयनों में समान धारा प्रवाहित की जाए, तो मुक्त पदार्थों का द्रव्यमान उनके रासायनिक तुल्यांकी भार (E) के समानुपाती होता है। (W₁/W₂ = E₁/E₂)

3. प्राथमिक सेल और लेक्लांशे सेल

  • प्राथमिक सेल: वे सेल जिन्हें दोबारा चार्ज (recharge) नहीं किया जा सकता। जैसे- शुष्क सेल।
  • लेक्लांशे सेल: इसमें एनोड जिंक (Zn) का, कैथोड कार्बन की छड़ (MnO₂ से घिरी) का और विद्युत अपघट्य NH₄Cl + ZnCl₂ का पेस्ट होता है। इसका उपयोग घड़ियों और रिमोट में होता है।

4. द्वितीयक सेल और लेड-एसिड बैटरी

  • द्वितीयक सेल: वे सेल जिन्हें बार-बार चार्ज करके दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
  • लेड-एसिड बैटरी: इसमें एनोड स्पंजी लेड (Pb) की प्लेटें, कैथोड लेड डाइऑक्साइड (PbO₂) की प्लेटें और विद्युत अपघट्य तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) होता है।

5. लेड संचायक बैटरी की अभिक्रियाएँ

  • डिस्चार्जिंग: Pb + PbO₂ + 2H₂SO₄ → 2PbSO₄ + 2H₂O
  • रीचार्जिंग: 2PbSO₄ + 2H₂O → Pb + PbO₂ + 2H₂SO₄

6. ईंधन सेल (Fuel Cell)

  • परिभाषा: वह सेल जो ईंधन (जैसे हाइड्रोजन) की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
  • H₂-O₂ सेल: इसमें सरंध्र कार्बन के इलेक्ट्रोड और सांद्र KOH का विलयन होता है। लगातार H₂ और O₂ गैस भेजने पर बिजली बनती है और उप-उत्पाद के रूप में केवल शुद्ध पानी (H₂O) निकलता है।

7. सेल अभिक्रियाएँ

  • Zn | Zn²⁺ || Ag⁺ | Ag: पूर्ण सेल अभिक्रिया: Zn + 2Ag⁺ → Zn²⁺ + 2Ag
  • Cr | Cr³⁺ || Pb²⁺ | Pb: पूर्ण सेल अभिक्रिया: 2Cr + 3Pb²⁺ → 2Cr³⁺ + 3Pb