घर्षण बल की उत्पत्ति और नियम
प्रश्न १. घर्षण बल की उत्पत्ति के कारण का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: घर्षण बल उत्पन्न होने का मुख्य कारण प्रत्येक पिण्ड की सतह पर कुछ उठान तथा खाँचों (ridges and grooves) का होना है, चाहे सतह कितनी भी चिकनी क्यों न हो।
जब दो सतहों को संपर्क में रखा जाता है, तो उनके उठान व खाँचे एक-दूसरे में फंस जाते हैं।
जब बाह्य बल लगाकर एक सतह को दूसरी सतह के संपर्क में रखकर चलाने का प्रयास किया जाता है, तो उन सतहों के मध्य गति विरोधी घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है।
इसके अतिरिक्त, घर्षण बल की उत्पत्ति का कारण संपर्क सतहों के मध्य लगने वाला आसंजक तथा संसंजक बल भी है।
घर्षण बल का मान संपर्क सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है; जितनी अधिक चिकनी सतहें होंगी, घर्षण उतना ही कम होगा।
प्रश्न 9. घर्षण के नियम लिखिए।
Answer: घर्षण के नियम
फ्रांसीसी वैज्ञानिक प्रो. चार्ल्स कूलॉम्ब ने प्रायोगिक निष्कर्षों के आधार पर घर्षण के नियमों का प्रतिपादन किया। इन नियमों को निम्नलिखित दो भागों में बाँटा जा सकता है:
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स्थैतिक या सीमान्त घर्षण के नियम (Laws of Static or Limit Friction)
स्थैतिक या सीमान्त घर्षण के नियम निम्नलिखित हैं:
स्थैतिक घर्षण सदैव गति का विरोध करता है। इसकी दिशा सदैव गति की दिशा के विपरीत होती है। यह घर्षण सम्पर्क तलों की प्रकृति पर निर्भर करता है। जब अभिलम्ब प्रतिक्रिया नियत होती है तब यह घर्षण सम्पर्क तलों के क्षेत्रफल या आकृति पर निर्भर नहीं करता है। सीमान्त घर्षण का मान \(F_{s}\), अभिलम्ब प्रतिक्रिया \(R\) के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात् \(F_{s}\propto R\) या \(F_{s}=\mu _{s}R\), जहाँ \(\mu _{s}\) एक नियतांक है, जिसे स्थैतिक घर्षण गुणांक कहते हैं। अतः स्थैतिक घर्षण और अभिलम्ब प्रतिक्रिया के अनुपात को स्थैतिक घर्षण गुणांक कहते हैं: \(\mu _{s}=\frac{F_{s}}{R}\)
घर्षण कम करने के उपाय
घर्षण को कम करने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
(1) पॉलिश द्वारा
Answer: पॉलिश द्वारा (By Polishing)
किसी वस्तु की सतह पर एक महीन परत लगाने को ही पॉलिश करना कहते हैं। यह पदार्थ सतह के प्रक्षेपणों के बीच के स्थान में भर जाता है, जिससे सतह चिकनी हो जाती है और घर्षण कम हो जाता है।
(2) स्नेहक द्वारा
Answer: स्नेहक द्वारा (By Lubricants)
जब संपर्क में रखी दो सतहों के बीच स्नेहक (तेल अथवा ग्रीस) डालते हैं, तब यह दोनों सतहों के बीच एक पतली परत के रूप में फैल जाता है। इससे दोनों सतहों का सीधा संपर्क नहीं हो पाता है तथा घर्षण काफी कम हो जाता है। वास्तव में, स्नेहक की परत की उपस्थिति में शुष्क घर्षण तरल घर्षण में बदल जाता है, जिसका मान अपेक्षाकृत काफी कम होता है।
(3) उचित पदार्थ के प्रयोग से
Answer: उचित पदार्थ के प्रयोग से (Use of Suitable Material)
घर्षण का मान पदार्थों की प्रकृति पर भी निर्भर करता है। कंक्रीट तथा लोहे के बीच घर्षण बल की तुलना में कंक्रीट तथा रबड़ के बीच घर्षण बल का मान कम होता है। इसी कारण वाहनों के टायर रबड़ के बनाए जाते हैं।
(4) लोटनी घर्षण द्वारा
Answer: लोटनी घर्षण द्वारा (By Rolling Friction)
लोटनी घर्षण काफी कम होता है। मशीन में टूट-फूट कम करने तथा घर्षण के विरुद्ध ऊर्जा ह्रास कम करने के लिए, मशीन के घूमने वाले भागों के बीच स्टील की छोटी-छोटी ठोस गोलियाँ रख देते हैं, जिनको बाल-बियरिंग (ball bearings) कहते हैं। जब एक भाग दूसरे भाग के सापेक्ष चलता है, तब ये गोलियाँ दोनों भागों पर घूमती हैं, जिससे गत्यात्मक घर्षण के स्थान पर लोटनी घर्षण ही प्रभावशाली होता है, जिसका मान बहुत कम होता है।
(5) धारारेखीय आकृति देकर
Answer: धारारेखीय आकृति देकर (By Giving Stream Line Shape)
जब कोई पिंड किसी तरल (द्रव अथवा गैस) में गति करता है, तब तरल घर्षण को कम करने के लिए पिंड की आकृति एक विशेष प्रकार की नुकीली (मछली के समान) बनाई जाती है। इससे तरल घर्षण कम हो जाता है। यही कारण है कि वायुयान, जेट आदि मछली की आकृति के बनाए जाते हैं।
धारारेखीय और विक्षुब्ध प्रवाह में अंतर
Answer: धारारेखीय प्रवाह में कणों का वेग और मार्ग निश्चित होता है, जबकि विक्षुब्ध प्रवाह में ये अनियमित होते हैं।
धारारेखीय (स्ट्रीमलाइन) और विक्षुब्ध (टर्बुलेंट) प्रवाह के बीच प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:
कण का वेग तथा मार्ग: धारारेखीय प्रवाह में किसी बिंदु से गुजरने वाले प्रत्येक कण का वेग और मार्ग वही रहता है जो उससे ठीक पहले वाले कण का था। विक्षुब्ध प्रवाह में, किसी बिंदु से गुजरने वाले कण का वेग समय के साथ बदलता रहता है और कणों का मार्ग भी अनियमित होता है।
क्रान्तिक वेग: धारारेखीय प्रवाह में प्रत्येक कण का वेग क्रान्तिक वेग से कम होता है। विक्षुब्ध प्रवाह में कण का वेग क्रान्तिक वेग से अधिक होता है।
मार्ग: धारारेखीय प्रवाह में कणों का मार्ग सरल रेखीय या वक्रीय होता है। विक्षुब्ध प्रवाह में प्रवाह का मार्ग टेढ़ा-मेढ़ा और अनियमित होता है।
समय के साथ परिवर्तन: धारारेखीय प्रवाह में किसी निश्चित बिंदु से गुजरने वाले कण का वेग और मार्ग समय के साथ नहीं बदलता है। विक्षुब्ध प्रवाह में, किसी निश्चित बिंदु से गुजरने वाले किसी कण का वेग तथा मार्ग समय के साथ बदलता रहता है।
दाब और घनत्व: धारारेखीय प्रवाह में प्रत्येक बिंदु पर द्रव के दाब और घनत्व स्थिर रहते हैं। विक्षुब्ध प्रवाह में प्रत्येक बिंदु पर द्रव के दाब और घनत्व बदलते रहते हैं
